• info@thesyaahi.com

कभी तो अपने ज़ज़्बात को हमारा कर दो।

.कभी तो अपने ज़ज़्बात को हमारा कर दो

होंठो से कुछ न कहो तुम आँखो से ज़रा इशारा कर दो

.डूबा दो अपने साथ मुझे भी

मगर जो साथ डूब रहे हैं उनको तो किनारा कर दो

.बहुत दिन से ये दिल खुश हैं।

प्यार करो मुझसे और दर्द करारा कर दो

.हमेशा मेरा ही नुकसान हुआ हैं मोहब्बत मे

कभी तो अपना भी खसारा कर दो

.बहुत संभल संभल के चलती हो राहो मे

आओ मेरे साथ अपने दिल को आवारा कर दो।

.अब तो समझो तुम मुझे, अब तो वाकिफ हो मुझसे

एक शाम मेरे साथ गुजारा कर दो।

.बहुत मगरूर रहा हैं ये दिल सबके सामने

अपने सामने इसको बेचारा कर दो।

.सोच के देखो मेरे इश्क़ को, हो सकें अगर तुमसे

अपने लिए इसको गवारा कर दो

Tags: , , , , , , , ,

0 thoughts on “कभी तो अपने ज़ज़्बात को हमारा कर दो।”

  1. Vinay says:

    Bhai ek dum gajab likhi h .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *