• info@thesyaahi.com

याद हैं बस तेरा होने तक

तुमसे मिला था जब सफर मे, याद हैं बस तेरा होने तक

फिर से हम मिले या ना मिले, याद हैं तुझको खोने तक।

एक वक्त था जब सिर्फ तुझे सोचा करता था

सोचता था जिंदगी के सपने सलोने तक।

वक्त नाकाफी बिताया हमने साथ मे,

हाँ बस याद हैं मुझे तेरी सारी यादें सँजोने तक।

हाथ भी पकड़ने से कतराता था तेरा,

याद हैं मुझे तेरे होंठो के छूने तक।

सजाए थे जो आशियाने हमने साथ मे।

याद हैं अब बस उस आशियाने के उजर जाने तक।

कई कहानियाँ भूल गया हूँ मैं आशिकों के

बस याद हैं मुझे सिर्फ हमारे फसाने तक।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Tags: , , , , , , , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *