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क्या मैं लिखू तेरे बारे मे?

एक बात पुछनी है तुमसे
क्या मै लिखू तेरे बारे मे?
हाँ मै जानता हूँ तुझे लिखते- लिखते मेरी पलके गीली हों जाएगी.
हाँ मै जानता हुँ की तुझे लिखते- लिखते शायद मेरे आँशु मेरे गालों को छुते हुए डायरी के पन्ने को भीगायेगी.
हाँ मै जानता हुँ तुझे लिखते- लिखते मेरा दिल भारी हों जाएगी.
हाँ मै जानता तुझे लिखते वक्त सिगरेट से यारी हो जाएगी.
फिर भी लिखना चाहता हुँ तेरे बारे मे
बता न
क्या मै लिखू तेरे बारे मे?
क्या मै लिखू तेरे उन आँखो के बारे मे
जिनमे हर घरी हर पल अपने लिए मोहब्बत का एक कतरा तलाश किया करता हूँ.
क्या मैं लिखू तेरे जुल्फो के बारे मे
जिससे मुझे बेशुमार जलन होती है
क्यू की वो तेरे गालों की तिलस्म को
शहलाया करती हैं.
क्या मैं लिखू तेरे हाथो के बारे मे जिसे तेरे साथ टहलते हूए हाथो मे थाम लेना चाहता हुँ.
लेकिन कुछ वजह है हमारे दरमियाँ जिस वजह से अपने आप को रोक लिया करता हुँ.
क्या मैं लिखू तेरे नादान हरकतो के बारे मे जिसपे अकेले मे सोच के पागलो की तरह हँसा करता हुँ.
बता न
क्या मैं लिखू तेरे बारे मे?
क्या मै लिखू
क्या मैं लिखू तेरे मुस्कुराहट के बारे मे
जिसपे पूरी कायनात अगर कुरबान कर दिया जाए तो भी बहुत मुख्तसर सी बात होगी.
क्या मैं लिखू तेरे जिस्म की खुशबू के बारे मे जिसे महसूस करके हर शक्स की साँसे मदहोश हो जाएगी.
क्या मैं लिखू तेरे cute से गाली के बारे मे
तेरा वो पागल हैं क्या कहना
और मेरा तुझे सौम्यता से ये बोलना गाली तो मत दे यार
सच कहता हुँ मैं नही लिख सकता तेरे बारे मे
क्यू की ना मेरे मे वो काबिलियत है न मेरे
पास अल्फाज मय्यसर.

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